रविवार, 23 अप्रैल 2017

यादों के तहखाने से ( भाग - 2 ) ------ विजय राजबली माथुर

****** " मुझे खेलों में भाग लेने का शौक नहीं था। लेकिन मुझे अपनी कक्षा के एक पहलवान टाईप सहपाठी जिसके पिताश्री पुजारी / कथावाचक थे का हमेशा कबड्डी में आउट न होना अखरता था। सुना था कि, वह रोजाना भगवा झंडे के साथ लगने  वाली शाखा में भाग लिया करता था। उसको सबक सिखाने के लिहाज से एक रोज़ मैंने उसकी विरोधी टीम में कबड्डी खेलने की इच्छा व्यक्त कर दी , ...........................उनको इस बात की खुशी थी कि, पढ़ाई में अनाड़ी छात्र ( जिसे अक्सर बेंच पर पूरे क्लास वह दंड स्वरूप खड़ा करते थे ) को खेल में भी चाहे एक ही बार सही उस छात्र ने परास्त कर दिया जिसे वह सराहते थे और जिससे अक्सर पाठ का वाचन करवाते थे। 
चूंकि पढ़ाई में फिसड्डी होने के कारण वह हम लोगों से मदद लेता था इसलिए अपनी हार पर भी प्रतिशोध उसने नहीं माना था। " ******

पचपन वर्ष पीछे 1962 में लौटते हैं तो ध्यान आता है कि, चीन के हमले के बाद जब बाबूजी का ट्रांसफर बरेली से सिलीगुड़ी हो गया था तब भी बीच सत्र में हम लोगों को दाखिले की समस्या का सामना करना पड़ा था वजह यह थी कि, बाबू जी का ट्रांसफर जहां हुआ वहाँ हम लोग नहीं गए थे । तब भी हम लोग शाहजहाँपुर नाना जी के पास रहने गए थे क्योंकि सिलीगुड़ी शुरू में नान - फैमिली स्टेशन घोषित हुआ था। बहन का दाखिला तो नाना जी ने अपने एक परिचित तिनकू  लाल वर्मा जी के प्रबंध वाले आर्य कन्या पाठशाला में सहजता से करवा दिया था। अंततः अपने एक और पूर्व परिचित के तल्लउआ, बहादुरगंज स्थित  विश्वनाथ जूनियर हाई स्कूल  में भाई व मुझे भी प्रवेश दिलवा दिया। 

स्कूल के बाहर खाली पड़ी ज़मीन में स्कूल के बच्चे इंटरवेल में कबड्डी वगैरह खेलते थे। मुझे खेलों में भाग लेने का शौक नहीं था। लेकिन मुझे अपनी कक्षा के एक पहलवान टाईप सहपाठी जिसके पिताश्री पुजारी / कथावाचक थे का हमेशा कबड्डी में आउट न होना अखरता था। सुना था कि, वह रोजाना भगवा झंडे के साथ लगने  वाली शाखा में भाग लिया करता था। उसको सबक सिखाने के लिहाज से एक रोज़ मैंने उसकी विरोधी टीम में कबड्डी खेलने की इच्छा व्यक्त कर दी , मैं रोज़ उसकी गतिविधियों को बारीकी से देखता रहा था। उसके विरोध की टीम का नेतृत्व हर नारायण नामक छात्र ही करता था जिसने मुझे सहर्ष शामिल कर लिया। हमारी टीम में हर नारायण समेत जब सभी छात्र आउट हो गए और मैं अकेला ही बचा तब वह पंडित पुत्र पहलवान छात्र आया मैं पीछे हटते  हुये  उसे पाले के अंतिम छोर तक ले आया और वहाँ कस कर उसका हाथ पकड़ लिया पूरी ताकत लगा कर भी वह छुड़ा न पाया , मुझे गिराया तो खुद भी गिर पड़ा और खींचता रहा किन्तु पाले तक न पहुँच पाया और उसे भी पहली बार आउट होना ही पड़ गया। यह खबर तुरंत प्राचार्य शर्मा जी तक पहुँच गई जो हम लोगों को हिस्ट्री (इतिहास ) पढ़ाते थे , वह सरदार पटेल हिन्दू इंटर कालेज के प्रिंसिपल पद से रिटायर्ड़ थे और निशुल्क पढ़ाते थे किन्तु आने - जाने का रिक्शा भाड़ा प्रबन्धक उनको दे देते थे। उनको इस बात की खुशी थी कि, पढ़ाई में अनाड़ी छात्र ( जिसे अक्सर बेंच पर पूरे क्लास वह दंड स्वरूप खड़ा करते थे ) को खेल में भी चाहे एक ही बार सही उस छात्र ने परास्त कर दिया जिसे वह सराहते थे और जिससे अक्सर पाठ का वाचन करवाते थे। 
चूंकि पढ़ाई में फिसड्डी होने के कारण वह हम लोगों से मदद लेता था इसलिए अपनी हार पर भी प्रतिशोध उसने नहीं माना था। एक बार नाना जी के साथ उनके किसी परिचित के यहाँ कथा में गए थे वहाँ भी वह अपने कथावाचक पिता जी के साथ उनके सहायक के रूप में आया था और बाद में उनको बताया था कि, हिस्ट्री में यह हमारी बहुत मदद करते हैं वैसे तो खेलते नहीं हैं लेकिन एक बार खेल कर मुझे हरा दिया था। उसके पिता जी ने हिस्ट्री में उसकी मदद कर देने के लिए शाबाशी ही दी थी। 
1963 में सिलीगुड़ी के फैमिली स्टेशन घोषित हो जाने पर माँ और बहन बाबू जी के पास चले गए थे। भाई और मैं नाना जी के पास ही रहे थे। जब नाना जी बाज़ार जाते थे हम भाई लकड़ी चीड़ कर रख देते थे और कुएं से पानी भी भर कर रख लेते थे। हालांकि नाना जी एतराज़ करते थे कि, तुम लोग पानी भरने और लकड़ी चीड़ने का काम क्यों करते हो ? इसलिए रोकने के लिए कभी कभी वह हम दोनों को भी बाज़ार अपने साथ ले जाते थे। 
वैसे तो नाना जी को गाना वगैरह पसंद नहीं था लेकिन अजय को वह अधिक चाहते थे इसलिए उसके गुनगुनाने पर एतराज़ नहीं करते थे। अजय को 'जो वादा किया वह निभाना पड़ेगा ' बेहद पसंद था उसी को अक्सर गुनगुनाते थे :

Link to this post-



रविवार, 5 मार्च 2017

यादों के तहखाने से ------ विजय राजबली माथुर

****** प्रो. माशूक अली साहब का संबंध शाहजहाँपुर म्यूनिसपेलटी के चेयरमैन रहे छोटे खाँ साहब के परिवार से था जिनके यहाँ लकड़ी का व्यापार होता था। अतः माशूक साहब वेतन नहीं लेते थे, प्रबन्धक उनको रिक्शा और पान का खर्च मात्र रु 150 / - उनको भेंट करते थे। वह हमारे नानाजी ( डॉ राधे मोहन लाल माथुर साहब ) के एक छोटे भाई हरीश चंद्र माथुर साहब के सहपाठी रहे थे इसलिए मेरे प्रति विशेष अनुराग रखते थे। वैसे वह सभी छात्रों के प्रिय थे। हमारे हरीश नाना जी को वह अक्सर ' सलाम ' कहने को कहते थे और नाना जी भी उनको मेरे द्वारा 'सलाम ' भेजते रहते थे। 
इसी प्रकार पंजाब नेशनल बैंक के एक ब्रांच मेनेजर साहब को भी उनके पुत्र द्वारा 'सलाम' का आदान - प्रदान वह करते रहते थे। उस छात्र ( अब मुझे नाम याद नहीं है ) को भी मेरी तारह ही विशिष्ट अनुराग उनसे मिलता था। किसी रोज़ रिक्शे से घर लौटते में उन्होने उसको कुछ गाते हुये सुन लिया था अतः अगले रोज़ कक्षा में उससे वह गाना सुनाने को कहा कुछ झिझकते हुये उनका आदेश न टाल सकने  के कारण उसको वह गाना सुनाना ही पड़ा ******

विगत माह की छह तारीख को शुभेच्छुओं को धन्यवाद की पोस्ट में श्रीमती जी ( पूनम ) का उल्लेख इसलिए नहीं था कि, प्रत्येक कार्य की संपन्नता में उनके आगमन के बाद से उनका योगदान रहता ही है और घर में हर बात के लिए धन्यवाद की औपचारिकता की आवश्यकता मेरे समझ से परे है। परंतु उनका तर्क है कि, यशवन्त का नाम तो दिया था। मेरे अनुसार पुत्र पत्नी का विकल्प नहीं होता। 

चाहें राजनीतिक गतिविधियां रही हों अथवा ड्यूटी से संबन्धित अथवा  सामाजिक एवं ज्योतिष से संबन्धित उन सब में ही पूनम का पर्याप्त योगदान रहा है। उनके योगदान के बगैर ज़रा भी आगे बढ़ना संभव नहीं था। 

इस पोस्ट के माध्यम से कुछ पुरानी यादों को पुनः प्रकाश में लाना उद्देश्य था। 50 वर्ष पूर्व 1967 में जब सिलीगुड़ी से स्कूल फ़ाईनल करने के बाद बाबू जी का औपचारिक ट्रांसफर आर्डर मिलने में विलंब था हम लोगों को पढ़ाई खराब होने से बचाने के लिए माँ के साथ नानाजी के पास शाहजहाँपुर भेज दिया था। सितंबर माह में दाखिले में काफी दिक्कत आई क्योंकि न तो बाबू जी का ट्रांसफर वहाँ हुआ था और न ही स्कूल कालेज्स में जगहें बची थीं और जिन विषयों को मैं लेना चाहता था न ही  उनका कांबीनेशन सुलभ था। बहन को दाखिला मिशन स्कूल, बहादुर गंज में व भाई को उसी मिशन स्कूल में दाखिला मिल गया था जिसमें क्रांतिकारी राम प्रसाद 'बिस्मिल' जी भी पढे थे। 
 जी एफ कालेज,कैंट के प्रिंसिपल चौधरी मोहम्मद वसी  साहब ने सहर्ष मेरे मन पसंद विषयों सहित इंटर फर्स्ट ईयर में दाखिले की अनुमति दे दी।उस समय इस कालेज में इंटर और बी ए की कक्षाएं चलती थीं अब यह एम ए तक हो गया है और इंटर कक्षाओं को इस्लामिया इंटर कालेज के साथ सम्बद्ध कर दिया गया है। सिविक्स के प्रोफेसर आर के इस्लाम साहब और हिस्ट्री के प्रोफेसर  माशूक अली साहब  विषय के साथ - साथ ज्ञान वर्द्धक सामान्य चर्चा भी किया करते थे। 
प्रो. माशूक अली साहब का संबंध शाहजहाँपुर म्यूनिसपेलटी के चेयरमैन रहे छोटे खाँ साहब के परिवार से था जिनके यहाँ लकड़ी का व्यापार होता था। अतः माशूक साहब वेतन नहीं लेते थे, प्रबन्धक  रिक्शा और पान का खर्च मात्र रु 150 / - उनको भेंट करते थे। वह हमारे नानाजी ( डॉ राधे मोहन लाल माथुर साहब ) के एक छोटे भाई हरीश चंद्र माथुर साहब के सहपाठी रहे थे इसलिए मेरे प्रति विशेष अनुराग रखते थे। वैसे वह सभी छात्रों के प्रिय थे। हमारे हरीश नाना जी को वह अक्सर ' सलाम ' कहने को कहते थे और नाना जी भी उनको मेरे द्वारा 'सलाम ' भेजते रहते थे। 

इसी प्रकार पंजाब नेशनल बैंक के एक ब्रांच मेनेजर साहब को भी उनके पुत्र द्वारा 'सलाम' का आदान - प्रदान वह करते रहते थे। उस छात्र ( अब मुझे नाम याद नहीं है ) को भी मेरी तारह ही विशिष्ट अनुराग उनसे मिलता था। किसी रोज़ रिक्शे से घर लौटते में उन्होने उसको कुछ गाते हुये सुन लिया था अतः अगले रोज़ कक्षा में उससे वह गाना सुनाने को कहा कुछ झिझकते हुये उनका आदेश न टाल सकने  के कारण उसको वह गाना सुनाना ही पड़ा , लीजिये  आप भी सुनिए ------

Link to this post-



सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

शुभेच्छुओं को धन्यवाद ------ विजय राजबली माथुर

video


कल फेसबुक पर 65 वर्ष व्यतीत होने पर 66वें जन्मदिवस पर जिन लोगों ने बधाई व शुभकामनायें प्रेषित की हैं लगभग सभी को धन्यवाद प्रेषित किया है , परंतु यदि किसी को छूट गया हो तो उन सभी जनों को एक बार फिर  हार्दिक धन्यवाद।  वैसे प्लेटो के कथनानुसार तो अधिकांश लोग मुझसे नफरत ही करते हैं फिर भी सोशल मीडिया फेसबुक के जरिये इतने लोगों की सद्भावनाएं प्राप्त होना आश्चर्यजनक भी है। कुछ के कमेंट्स संग्रहीत करने के उद्देश्य से यहाँ संकलित कर लिए हैं। 


यशवंत राजबली माथुर द्वारा 









Link to this post-



सोमवार, 9 जनवरी 2017

ये चुनाव तय करेंगे भविष्य की बुनियाद : सहानुभूति लहर का फायदा पाएँगे अखिलेश यादव ------प्रो .मनीषा प्रियम / रजनीश कुमार श्रीवास्तव












Rajanish Kumar Srivastava
02-01-2016  · 
जनाब यू०पी० चुनाव में साईकिल फ्रीज होगी और फिर मोटरसाईकिल फर्राटे से दौड़ेगी।आश्चर्य ना कीजिएगा यह सत्य होने जा रहा है।यू०पी० चुनाव के मद्देनजर मेरा विश्लेषण है कि अगर प्रचार के चकाचौंध से इतर जमीनी हकीकत की पड़ताल की जाए तो आज भी यू०पी० का चुनाव सपा(अखिलेश यादव) के सम्भावित महागठबंधन और बसपा के बीच ही सिमटने जा रहा है।कारण बहुत स्पष्ट है कि एक ओर मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे युवा अखिलेश यादव तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री का चेहरा होंगी सुश्री मायावती।लेकिन भाजपा ने रणनीतिक गलती करते हुए मुख्यमंत्री का चेहरा किसी को ना बनाने की रणनीति अपनाई है।बिना नरेन्द्र मोदी के भाजपा का अपना वोट यू०पी० में 15% से ज्यादा कतई नहीं हैं।यह मोदी फैक्टर था जिसने लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 30% वोटों तक पहुँचा दिया था। इस पृष्ठभूमि में केन्द्र सरकार भी आधा से ज्यादा कार्यकाल बिताने के बाद भी किसानों और मजदूरों के खाते में कोई ऐसी उपलब्धि नहीं डाल सकी है जिससे ग्रामीण क्षेत्र में वैसी मोदी लहर आ सके जैसी लोकसभा चुनाव में पैदा की गयी थी। लिहाजा मुख्य मुकाबला 25% से 30% तक का अक्षुण जनाधार रखने वाली बसपा और सपा (अखिलेश यादव) महागठबंधन के बीच होने जा रहा है।इसमें भी बेहतर रणनीतिक तैयारी की वजह से अखिलेश यादव महागठबंधन बड़ी जीत हासिल कर लेगा।कैसे चलिए एक पड़ताल की जाए:--
सपा में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव खेमें की वर्तमान लड़ाई अखिलेश यादव का सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक है।बेहद स्मार्ट मूव के तहत अखिलेश खेमें ने अपनी वर्तमान चुनौतियों को एक लाभ के अवसर के रूप में परिवर्तित कर लिया है।गुँण्डागर्दी के आरोप वाली परम्परावादी समाजवादी पार्टी से पीछा छुड़ा लिया है और गुण्डों और बाहुबलियों के विरुद्ध संघर्ष करने वाली और केवल विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की घोषणा करने वाली प्रगतिशील पार्टी की छवि बखूबी गढ़ ली है।पार्टी के इस अंदरूनी संघर्ष को जानबूझकर अखिलेश यादव ने चुनाव के समय नजदीक आने पर निर्णायक मोड़ दिया है और प्लान A और प्लान B दोनों तैयार रखें हैं।मुलायम खेमा चारो खाना चित गिरने जा रहा है।अब जबकि पार्टी में चुनाव चिन्ह का मामला चुनाव आयोग की दहलीज पर पहुँच चुका है तो अखिलेश खेमा तय रणनीति के तहत जानता है कि इतना कम समय चुनाव में बचा है कि चुनाव आयोग के सामने साईकिल चुनाव चिन्ह फ्रीज करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता शेष नहीं हैं ऐसे में अखिलेश खेमें ने प्लान B के तहत एक सुरक्षित पार्टी #समाजवादी जनता पार्टी# का इंतजाम पहले से सुरक्षित कर लिया है जिसका चुनाव चिन्ह है मोटरसाईकिल।जबकि मुलायम खेमा बिना तैयारी के इतना मुलायम हो जाएगा जहाँ बचेगी तो सिर्फ भगदड़। यहाँ अखिलेश यादव जहाँ एक तरफ एण्टी इन्कम्बेन्सी वाली सारी विरासत को पीछे छोड़कर प्रगतिशील पार्टी के रूप में सहानुभूति लहर का फायदा पाएँगे वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन की बड़ी ताकत के साथ लगभग तीन सौ सीटों पर फर्राटे से मोटरसाईकिल चलाते हुए दमदारी से विधानसभा भवन में प्रवेश कर जाएँगे।यानी जिसका जलवा कायम है उसका बाप मुलायम है। चुनाव परिणाम बताएगा कि मेरा विश्लेषण कितना सही है।

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1770129799978293&set=a.1488982591426350.1073741827.100009438718314&type=3
*****************************************

विभिन्न विश्लेषण व विचार पहली जनवरी के विशेष सपा अधवेशन के संबंध में आप देख पढ़ रहे हैं। हम यहाँ केवल ग्रह - नक्षत्रों का विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं । 01-01-2017 को प्रातः 11:30 पर सपा के विशेष प्रतिनिधि सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव को पार्टी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ जो सर्व - सम्मति से स्वीकृत हुआ।
*यह समय चंद्र महादशा में गुरु की अंतर्दशा का हुआ जो सामान्य है और 13 दिसंबर 2017 तक रहेगा,  इसीलिए उनके लिए स्थितियाँ भी सामान्य ही बनी रहीं और बनी रहेंगी। फिर 13 जूलाई 2019 तक शुभ समय रहेगा। 13 मार्च 2023 तक श्रेष्ठ समय भी रहेगा लेकिन 13 जूलाई 2019 से 12 दिसंबर 2020 तक बीच के समय में ज़रूर सतर्कता पूर्वक चलना होगा। 
* उस समय लखनऊ में कुम्भ लग्न चल रही थी जो एक स्थिर राशि की लग्न है ।यही कारण है कि, यह पद  चुनाव स्थिर रहने वाला है  और सभी सम्झौता प्रस्ताव किसी भी कारण से असफल रहे हैं। लग्न में ही मंगल, केतू व शुक्र ग्रह स्थित हैं। जहां मंगल, केतु नेतृत्व क्षमता में दृढ़ता के परिचायक हैं वहीं शुक्र सौम्यता, मधुरता व दूरदर्शिता के लक्षण बताता है जिस कारण वह किसी दबाव या प्रलोभन में झुक न सके । 
* दिवतीय भाव में जो राज्यकृपा का होता है मीन लग्न स्थित है जिसका स्वामी ब्रहस्पति अष्टम भाव में बैठ कर पूर्ण सप्तम दृष्टि से उसे देख रहा है। अतः उन पर आगे भी राज्य - योग कृपा बनाए रखेग। 
*तृतीय भाव में जो जनमत, पराक्रम व स्वाभिमान का होता है मेष लग्न स्थित है जिसका स्वामी मंगल लग्न में ही बैठ कर अनुकूलता प्रदान कर रहा है और इसी कारण पार्टी पदाधिकारियों के 90 प्रतिशत का समर्थन ही उनको न केवल मिला वरन जनमत सर्वेक्षणों में भी लोकप्रियता हासिल रही है। इस प्रकार उनका स्वाभिमान आगे भी बरकरार रहने की संभावनाएं बनी हुई हैं। 
*चतुर्थ भाव में जो लोकप्रियता व मान -सम्मान का होता है वृष राशि स्थित है जिसका स्वामी लग्न में बैठ कर उनमें दूरदर्शिता का संचार कर रहा है अतः आगामी चुनावों में भी उनको इसका लाभ मिलने की संभावनाएं मौजूद हैं। 
*पंचम भाव में जो लोकतन्त्र का होता है मिथुन लग्न स्थित है जिसका स्वामी बुध लाभ के एकादश भाव में सूर्य के साथ स्थित है। बुध सूर्य के साथ होने पर और अधिक बलशाली हो जाता है तथा सूर्य - बुध मिल कर आदित्य योग भी बनाते हैं जो कि, राज्य योग होता है। अतः चुनावों में अखिलेश जी की सफलता लोकतन्त्र को मजबूत करने वाली ही होगी क्योंकि इससे फासिस्ट शक्तियों को मुंह की खानी पड़ेगी। 
*सप्तम भाव में जो सहयोगियों, राजनीतिक साथियों व नेतृत्व का होता है सिंह राशि स्थित है जिसका स्वामी सूर्य एकादश भाव में गुरु की राशि धनु में बुध के साथ स्थित है। इसके अतिरिक्त इस भाव में राहू भी बैठ कर कुम्भ लग्न को देख रहा है जो उसकी अपनी राशि भी मानी जाती है। इस प्रकार अखिलेश जी अपनी पार्टी के बुद्धिजीवियों, नेताओं और साथियों में अधिकांश का समर्थन पाने में सफल रहे हैं जो फिलहाल जनतंत्र व जनता के लिए उत्तम स्थितियों का ही संकेत करता है। उम्मीद है कि, अपने बुद्धि कौशल से वह ग्रहों की अनुकूलता का पूर्ण लाभ उठाने में सफल रहेंगे। 
(विजय राजबली माथुर )
https://www.facebook.com/vijai.mathur/posts/1297391700322803


***********************

Facebook Comments : 

Link to this post-



मंगलवार, 3 जनवरी 2017

कहते हैं लालाजी निर्मल साहब : 'अगर आप धनपशु नहीं हैं तो आज की राजनीति में सर्वाईव नहीं कर सकते' ------ विजय राजबली माथुर



हिंदुस्तान,लखनऊ,02-01-2016,पृष्ठ ---02

वर्ष 1979 में  RSS (राजनारायन संजय संघ ) के सहयोग से चौधरी चरण सिंह जी प्रधानमंत्री बन चुके थे और उनके भांजे साहब को होटल मौर्य कर्मचारी संघ ,दिल्ली का अध्यक्ष बना दिया गया था जो आगरा आकर होटल मुगल कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों को दिल्ली  आमंत्रित कर गए थे। आगरा से पाँच प्रतिनिधि दिल्ली गए थे जिनमें महामंत्री की हैसियत से मैं भी शामिल था। लौटते में G T एक्स्प्रेस में हमारे साथियों का सीट को लेकर विवाद जिन सज्जन से हुआ वह डॉ राजेन्द्र कुमारी बाजपेयी (राज्यसभा सदस्य एवं यू पी की पूर्व विद्युत मंत्री ) के भांजे साहब थे। मैंने उनको बैठने का स्थान उपलब्ध करा दिया और चर्चा के दौरान उनसे उनके राजनीति में शामिल होने के बारे में  उनके विचार पूंछे । वह तब बिजनेस प्रारम्भ किए ही थे और उनका कहना था कि, जब पर्याप्त धन जुटा लेंगे तभी राजनीति में उतरेंगे; मेरे लिए भी उनका सुझाव था कि, यदि मुझे राजनीति में आना हो तो पहले बिजनेस करके धन एकत्र करूँ तभी आऊँ वरना कामयाब नहीं हो पाऊँगा। आज की परिस्थितियों में उनका कथन अक्षरश : सत्य प्रतीत होता है।

सारू स्मेल्टिंग कर्मचारी  संघ,मेरठ  की कार्यकारिणी और फिर होटल मुगल कर्मचारी संघ, आगरा के महामंत्री रह चुकने के बाद AITUC की मार्फत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, आगरा के ज़िला कोषाध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुका हूँ तथा सक्रिय राजनीति में भी शामिल रहता हूँ लेकिन कोई बिजनेस या व्यवसाय न करने के कारण वरिष्ठ नेताओं को प्रभावित कर पाने  में असमर्थ रहता हूँ। बीच मे (बाद में 2006 में पुनः भाकपा में वापिस लौट चुका हूँ और अब लखनऊ में सक्रिय हूँ  ज़िला काउंसिल में भी रहा हूँ )जब कामरेड मित्रसेन यादव जी के साथ  सपा में रहा था तब आगरा में नगर कार्यकारिणी में भी मुझे शामिल किया गया था। जब  2002 में आगरा मे सपा का विशेष राष्ट्रीय अधिवेन्शन हुआ था तब नगर महामंत्री फारुखसियर ने मुझसे पूछा था आपके पास वाहन क्या है? मेरे जवाब देने पर कि, साईकिल वह बिदक गए थे, मतलब कि, साधन - सम्पन्न होना ही सफलता का मंत्र था और यहाँ फिर 1979 में मिले रेल यात्री बाजपेयी साहब का कथन सत्य हो रहा था।
अभी सपा में जो राजनीतिक घमासान दीख रहा है वह वस्तुतः आर्थिक घमासान है जैसा कि, किरण्मय नंदा साहब ने कहा भी है कि, अमर सिंह सपा में व्यापार करने आए थे। मूलतः अमर सिंह राजनीतिज्ञ नहीं विशुद्ध व्यापारी ही हैं। जब वीर बहादुर सिंह जी यू पी के सिंचाई विभाग में ठेकेदार थे तब अमर सिंह जी उनके साथ पेटी ठेकेदार थे। वीर बहादुर जी कांग्रेस सरकार में सिंचाई मंत्री ही बनते थे क्योंकि उसी विभाग में उनका बिजनेस चलता था , मुख्यमंत्री होते हुये भी सिंचाई विभाग अपने ही पास रखे रहे थे। उसी समय विरोधी दल के नेता मुलायम सिंह जी को वीर बाहादुर सिंह जी के गोपनीय सूत्र उपलब्ध कराते रहने के कारण  उनके हितैषी बन गए  और आज भी बने हुये हैं पूर्व सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह जी भी उनके चहेते हैं। सिंचाई विभाग की ठेकेदारी से ही अपना बिजनेस बढ़ाते हुये आज उद्योगपति बन चुके हैं और राजनीति को प्राभावित करने की अपार क्षमता अर्जित कर चुके हैं।

वर्तमान परिस्थितियाँ भी उस व्यापारिक गतिविधि से उत्पन्न हुई हैं जिसे ZEE NEWS के मालिक सुभाष चंद्रा  साहब के राज्यसभा सदस्य बनने के उपलक्ष्य में दी गई अमर सिंह जी की पार्टी में जन्म मिला था। भाजपा के ज़ी न्यूज़ वाले अमर सिंह जी के सहयोग से यू पी में अपना बिजनेस खड़ा करना चाहते थे जिसमें मुख्यसचिव दीपक सिंघल का सहयोग मिलता। इसी कारण मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी ने राहुल भटनागर साहब को सिंघल साहब के स्थान पर मुख्यसचिव बना दिया था जिसकी कीमत उनको यू पी सपा के अध्यक्ष पद से हटने  के रूप में चुकानी पड़ी। चूंकि भाजपा सांसद यू पी में अपना बिजनेस नहीं जमा सके तो अमर सिंह जी के माध्यम से अखिलेश यादव जी के समक्ष पारिवारिक - राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया गया। वर्तमान परिस्थितियों  में जनतंत्र समर्थक और सांप्रदायिकता विरोधी शक्तियों को एकजुट होकर अखिलेश यादव जी का ठोस समर्थन करना चाहिए अन्यथा 2019 में फासिस्ट शक्तियाँ और मजबूत होकर सामने आ सकती हैं।


****************************************
Facebook Comments : 
04-01-2017 
04-01-2017 

Link to this post-



+Get Now!